गुरुग्राम हत्याकांड

शिक्षा का दर यूँ मौत का घर होगा, सोचा ना था वो मासूम यूँ बेघर होगा।

किसी का लाल हुआ साजिश का शिकार यहाँ, इस ग़म से न जाने कैसे आगे का सफर होगा।

माँ के टूटे सपने सजाएगा कौन, पिता के अरमान को लौटाएगा कौन,

वो खिलौने,वो कपड़े देख बिलखता होगा मन, इन्हें लेकर अब पढ़ने को जाएगा कौन।

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