रचनायें

कविता

कई दिनों से कविता उदास रहती है। व्यस्त जिन्दगी में भी आसपास रहती है। नहीं मिलता वक्त उससे मिलने का जरा भी- इसीलिए आजकल थोडा़ […]

सुनो एक योजना है।

जब तलक पूरी न होगी, इस जहाँ में जिद हमारी। जुबाँ पर फरियाद होगी, अवज्ञाएँ फिर हमारी। जब तलक ना वक्त साथी, दुख तो यूँ […]

खुश्बू जानी-पहचानी थी

मुद्दतों बाद वो दिखे मुझे, पर अपनों की निगरानी थी, खुश्बू जानी-पहचानी थी। एक दिवस मैं गया था, लेने कुछ सामान, कोई बगल से गुजरा, […]

कोई तो है

सोई हुई रातों में, धड़कनें बढ़ाती है, कोई तो है जो दिल को लुभाती है। उस बात की आज भी, देखिए खुमारी है, मुस्कुराकर जब […]

बेटियाँ

बेटियाँ कच्चे बाँस की तरह, पनपती आधार हैं। बेटियाँ ही अनवरत, प्रकृति की सृजनहार हैं। किसी भी संदेह में ना, उन्हें मारा जाय। उनको भी […]

शायरी

नजर गर किसीकी जो मुझ पर है ठहरे, उन्हें चाहतो की मैं दुनिया थमा दु हसीन वादियो में गर मिलन हो हमारा, उन्हें इस जहाँ […]

अभी-अभी तो होश में आया हूँ मैं

न देखिये यूं तिरछी निगाहों से मुझे, अभी-अभी तो होश में आया हूँ मैं। मदहोश था अब तक उनकी आराईश में यूं, लगता था खुद […]

तो याद करना

कोई दर्द, कोई चुभन जब हद से गुजर जाए,तो याद करना, जिन्दगी में कभी जरूरत पड़ जाए,तो याद करना। बिछड़ते वक्त के ये आखिरी, अल्फाज […]

ये कैसी बारिश आई है

नभ के हर कोने पर,तेरी ही रानाई है, ये कैसी बारिश आई है। अधरों के तपते शोलों पर,शबनम की बूँद लुभाई है, सदियों से प्यासे […]

मेरा सिद्धांत

आदर्श मेरा वो नहीं, जो शीर्ष पर आसीन हो, और अपने कर्म से, निष्कृय हो, उदासीन हो। आदर्श मेरा निम्न स्तर का बशर होगा अगर, […]

पत्रकार

आइना थे एक पक्ष के पक्षकार हो गए, सियासत में पड़कर ये भी बेकार हो गए। हर बात को सफाई से दुनिया को बताने वाले, […]

उलाहना

पथरीली राहों पर तुम गुलाब माँगते थे, हर बात का उछल कर जवाब माँगते थे। वक्त का करवट देखो तुम्हें भी देना पड़ेगा, जैसे तुम […]

बी. एच. यू.

महिला सशक्त तो परम ध्येय था, फिर तो क्या मसला अजेय था। क्यों निर्दयता पेश किया इस मसले पर, क्या जनता का यही असली विधेय […]

मेरा गाँव

हर रिश्ते में पहले लगाव सा था, रिश्ते निभाना जैसे स्वभाव सा था। जाने कहाँ खो गयी वो रमणीयता अब, पहले तो मेरा गाँव,एकदम गाँव […]

शितलहरी

शाँन्त चित्त में जैसे इक, उन्माद जगाती है, सुबह-सुबह देखो शितलहरी, कैसी आती है।   पेड़ों के साखों में आकर, हर रोज़ जगाती है, पत्तों […]

समसामयिकी

दुश्मन को पहचान कर भी गले लगाते हैं, किसी के विरोध की ये कैसी पराकाष्ठा है।

मुक्तक

नये मौकों से हाथ मिलाते रहिए, किस्मत को रोज़ आजमाते रहिए। असमंजस में पड़े रहना अच्छी बात नहीं, ठान लिया है तो परिणाम तक जाते […]

अभी तो नहीं….

देश खोखला है, तिजोरी खाली है, तो क्या कर्जा लेकर,ये भरने वाली है। मुद्दों की बात भी कुछ करलो साहेब कभी, गरीबरथ चलती नहीं,बुलेट कहाँ […]

गुरुग्राम हत्याकांड

शिक्षा का दर यूँ मौत का घर होगा, सोचा ना था वो मासूम यूँ बेघर होगा। किसी का लाल हुआ साजिश का शिकार यहाँ, इस […]